Strength Training for Children

Many times children start looking after adults to get a fit body like them, or they want to get some information about Strength Training. It often comes to the minds of parents that should children also trained in Strength? Is it just for elders? Let’s know about Strength Training of Children –

Children Can Do Strength Training

Now here the children means the children of that age who can follow Instructions by understanding the proper meaning of exercise and fitness. That is, with the right trainer, they can understand and learn the exercises. Secondly, strength training means not only to make six packs, body building or weightlifting. In the case of children it is very helpful in the development of strong muscles, and its exercise for children is also different. Only good and trained guides are required.

Benefits of Training

Playing a good running game of children is also not less than a workout, and it can also be useful for exercising, but if teenagers or some older children are linked to Strength Training, there can be a lot of benefits. some of the benefits are :-

  1. Children’s muscles become strengthen. In addition, his muscles and bones can also be greatly protected from injuries during the game.
  2. This increases the athletic capacity of the child. Apart from this, it is helpful in increasing the child’s stamina in sports, dance or other physical activities.
  3. Children develop a tendency for a lifetime fitness, their exercise routine becomes proper and they are motivated to stay healthy throughout life.
  4. In the future, the risk of problems like blood pressure, cholesterol, obesity, diabetes etc. becomes very less.

When to start

When the child become so older that he can properly understand the instructions given for the exercise. If you have the right guidance then it can be started from the age of 7-8 years. Keep these things in mind when you start –

  1.  First of all, explain to the child that the purpose of this training is to strengthen his muscles and bones, not to make six packs. Neither did he has to adopt it from seeing anybody else. Also, that the exercises for them will be different from the elder, so he has to learn them gradually.
  2. Consult the child’s doctor that is his physical condition is suitable for this training? Especially if the child has any special medical history.
  3. According to the age, body and state of the child, choose the trainer who has the experience of training the children and he can teach the child safely.
  4. Tell the child about the importance of warm up before training. It can be done by any aerobic activity such as jogging, walking, rope jumping etc. With this, after the training session, motivate the child for stretching too, the benefit increases with both of these things.
  5. It is important to take care of the right technique. For this, call the trainer.
  6. Rest is also necessary in the middle of the training. Therefore, taking this training for two to three sessions in the week will be enough for the child. During this time, keep the child busy in sports or other exercises.
  7. Remember this and also tell the child that the result of this training will not be achieved in one day, therefore patience is necessary. Training is a good habit for not just a few months but a whole life. And help your child to maintain it. It is beneficial for lifetime.

 

In Hindi :-
हिंदी में :-

 

बच्चों की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

कई बार वयस्कों को देखकर बच्चे उन जैसा कसरती बदन पाने के लिए जिम जाना शुरू करते हैं, या वे स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के बारे में कुछ जानकारी पाकर उसे अपनाना चाहते हैं | पैरेंट्स के मन में अक्सर यह बात आती है कि क्या बच्चों को भी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करनी चाहिए ? कहीं ये सिर्फ बड़ों के लिए तो नहीं ? आइए जानते है बच्चों की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग के बारे में –

बच्चे कर सकते हैं स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

अब यहां बच्चों से मतलब उस उम्र के बच्चों से हैं जो कसरत और फिटनेस का सही मतलब समझकर, इंस्ट्रक्शंस को फॉलो कर सकते हैं | यानी किसी सही प्रशिक्षक के साथ वे एक्सरसाइज की समझ और सीख सकते हैं या नहीं | दूसरी बात यह कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का मतलब केवल सिक्स पैक बनाना, बॉडी बिल्डिंग करना या वेटलिफ्टिंग करना ही नहीं होता | बच्चों के मामले में यह मजबूत मसल्स बनाने के साथ ही उनके सम्पूर्ण विकास में मददगार होती है और बच्चों के लिए इसकी एक्सरसाइज भिन्न भी होती है | जरुरत सिर्फ अच्छे और प्रशिक्षित मार्गदर्शक की होती हैं |

ट्रेनिंग के फायदे

यूं बच्चों का अच्छी भागदौड़ वाले खेल खेलना भी किसी कसरत से कम नहीं और इससे उनकी व्यायाम की कसर पूरी भी हो सकती है लेकिन किशोरों या थोड़े बड़े बच्चों को यदि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग से जोड़ा जाए तो काफी सारे फायदे हो सकते हैं | जैसे कि :-

  1. बच्चे की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और सुदृढ़ बनती हैं | साथ ही उसकी मसल्स और बोन्स को खेल के दौरान लगने वाली चोटों से भी बहुत हद तक सुरक्षा मिल सकती है |
  2. इससे बच्चे में एथलेटिक क्षमता बढ़ती है | इसके अलावा खेलों, डांस या अन्य दौड़भाग वाली शारीरिक गतिविधियों में यह बच्चे का स्टेमिना बढ़ाने में सहायक होती है |
  3. बच्चे में फिटनेस के प्रति जीवनभर के लिए रुझान पैदा होता है, उसका एक्सरसाइज का प्रॉपर रूटीन बनता है और वह जीवनभर स्वस्थ रहने को प्रेरित होता है |
  4. भविष्य में उसे ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रोल, मोटापा, डाइबिटीज आदि जैसी समस्याओं की आशंका बहुत कम हो जाती है |

कब करें शुरू

जब से बच्चा इतना बड़ा हो कि वह एक्सरसाइज के लिए दिए जा रहे निर्देशों को सही तरह से समझकर पालन कर सके | यदि सही मार्गदर्शन हो तो इसे 7-8 वर्ष की उम्र से भी शुरू किया जा सकता है | शुरुआत करते समय इन बातों का ध्यान रखें –

  1. सबसे पहले बच्चे को यह जरुर समझाएं की इस ट्रेनिंग का उद्देश्य उसकी मसल्स और हड्डियों को मजबूत बनाना है, सिक्स पैक्स बनाना नहीं | न ही उसे किसी की देखा देखी इसे अपनाना है | साथ ही यह भी कि उसके लिए होने वाली एक्सरसाइज बड़ो से भिन्न होंगी इसलिए उसे धीरे धीरे इन्हें सीखना है |
  2. बच्चे के डॉक्टर से परामर्श लें कि क्या उसकी शारीरिक स्थिति इस ट्रेनिंग के लिए उपयुक्त है ? खासकर यदि बच्चे की कोई स्पेशल मेडिकल हिस्ट्री रही है तो |
  3. बच्चे की उम्र, शरीर और अवस्था के हिसाब से ऐसे प्रशिक्षक को चुने जिसे बच्चों को ट्रेनिंग देने का अनुभव हो तथा वह सुरक्षित तरीके से बच्चे को सिखा सके |
  4. ट्रेनिंग के पूर्व वार्म अप करने के महत्व के बारे में बच्चे को बताएं | यह किसी भी एरोबिक एक्टिविटी जैसे जॉगिंग, वाकिंग, रस्सी कूदने आदि के द्वारा किया जा सकता है | इसके साथ ही ट्रेनिंग के सेशन के बाद स्ट्रेचिंग के लिए भी बच्चे को प्रेरित करें, इन दोनों ही चीजों से फायदा बढ़ जाता है |
  5. सही तकनीक का ध्यान रखना जरुरी है जिसके लिए ट्रेनर को कहें |
  6. ट्रेनिंग के बीच में रेस्ट करना भी आवश्यक है | इसलिए हफ्ते में इस ट्रेनिंग के दो-तीन सेशन बच्चे के लिहाज से काफी होंगे इस बात का ख्याल रखें | इस दौरान बाकी के दिनों में बच्चे को खेल-कूद या अन्य व्यायामों में व्यस्त रखें |
  7. यह याद रखें और बच्चे को भी बताएं कि इस ट्रेनिंग के परिणाम एक दिन में नहीं मिलेंगे इसलिए धैर्य रखना आवश्यक है | ट्रेनिंग कुछ महीनों की नहीं बल्कि हमेशा की अच्छी आदत है और इसे बनाए रखने में बच्चे की मदद करें | यह पूरे जीवन उसे फायदा देगी |

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